नाटो की रक्षा नीति पर ट्रंप का टालमटोल! सहयोगी देशों में मची हलचल | Hague Summit 2025 से Exclusive रिपोर्ट


आपकी परिभाषा पर निर्भर करता है…” ट्रंप
क्या अमेरिका अब नाटो का भरोसेमंद साझेदार है?


नीदरलैंड के हेज शहर में चल रहे NATO शिखर सम्मेलन 2025 में एक बार फिर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान विवादों में है।
जहां सभी देश नाटो अनुच्छेद 5 (Article 5) की रक्षा प्रतिबद्धता की पुष्टि कर रहे थे, वहीं ट्रंप ने दिया ऐसा जवाब जिसने पूरा मंच सकते में डाल दिया


क्या कहा ट्रंप ने?
“यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अनुच्छेद 5 को कैसे परिभाषित करते हैं।”
— ट्रंप ने इस तरह से नाटो की सामूहिक रक्षा नीति पर सीधा जवाब देने से बचाव किया

अनुच्छेद 5 क्या है?
यह नाटो का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा सिद्धांत है —
एक देश पर हमला, सभी पर हमला माना जाएगा।”
इसी आधार पर अमेरिका सहित सभी सदस्य देश एक-दूसरे की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं।

क्यों है ये बयान चिंताजनक?

  • यूरोपीय देशों को डर है कि यदि रूस या कोई और देश हमला करता है, तो अमेरिका सैन्य सहायता देने से मुकर सकता है
  • इससे नाटो की साख और भविष्य दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।

सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया

  • फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड ने एक स्वर में नाटो की एकजुटता पर जोर दिया
  • लेकिन पर्दे के पीछे से आई खबरें कहती हैं कि कई देश अब अपने-अपने सैन्य बजट बढ़ाने की तैयारी में हैं

👉 2024 में ट्रंप ने कहा था कि “जो देश अपने हिस्से का रक्षा खर्च नहीं दे रहे, उन्हें हम क्यों बचाएं?”
👉 अब 2025 में भी वही रुख दोहराकर ट्रंप ने यह जता दिया है कि अगर वो फिर से राष्ट्रपति बने, तो अमेरिका की विदेश नीति में बड़ा बदलाव संभव है।



क्या नाटो में दरार की शुरुआत हो चुकी है?
क्या ट्रंप का यह रुख आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा को कमजोर करेगा?
आप क्या सोचते हैं — कमेंट में जरूर बताएं!

 “जब नाटो पर सबसे ज़्यादा भरोसा करने की ज़रूरत है, तभी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को उलझन में डाल दिया है…”

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