
आज हम बात करेंगे इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण एयर युद्ध के बारे में, जिसमें यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टी-टू-वीक डिप्लोमैटिक विंडो—’दो सप्ताह का समय’—दी है।”
- इस्राइली हमले की शुरुआत
13 जून, 2025 को इज़राइल ने ईरान पर एयर स्ट्राइक की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य ईरानी परमाणु और मिसाइल सुविधाओं को निशाना बनाना था। इन हमलों में एसपीएनडी, नतांज और अरक जैसे रणनीतिक ठिकाने शामिल थे - ईरानी जवाबी कार्रवाई
इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे इज़राइल में नागरिक क्षति भी हुई, जिसमें अस्पताल व आवासीय क्षेत्र भी शामिल थे ।
🔹 जनहानि एवं मानवीय असर
- ईरानी रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़राइली हमलों में लगभग 639 लोगों की मृत्यु हुई—जिसमें सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक भी शामिल हैं—जबकि इज़राइल ने ईरानी हमलों से नागरिकों की मौत की संख्या कम बताते हुए कुछ दर्जन बताया ।
- इज़राइल में हुए हमलों से सैकड़ों लोग घायल हुए, अस्पतालों व सिविल संरचनाओं को क्षति हुई
🔹 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीति

- यूरोपीय मध्यस्थता
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी सहित यूरोपीय विदेश मंत्रियों की बैठक जिनेवा में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरगची से होगी ताकि तनाव को कूटनीतिक रूप से नियंत्रित किया जा सके । - रूसी–चीनी दबाव
रूस के व्लादिमीर पुतिन और चीन के शी जिनपिंग ने इस्राइली हमलों की निंदा की और दोनों ने कहा कि “कोई सैन्य समाधान नहीं” है और स्थिति को “राजनयिक रूप से” सुलझाया जाना चाहिए ।
🔹 ट्रंप की “दो सप्ताह की खिड़की”
- व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप अगली दो हफ्तों में निर्णय लेंगे—या तो सैन्य हस्तक्षेप करने का, या नए कूटनीतिक ऑप्शन का
- ट्रंप मिसाइल हमलों के जरिए ईरानी परमाणु स्थलों पर “बंकर बस्टर” हमला करने पर विचार कर रहे थे, लेकिन पूर्व लीबिया हस्तक्षेप के बाद उत्पन्न अराजकता के डर से निर्णय को टाल दिया ।
🔹 भविष्य के परिदृश्य
- अगर ट्रंप “युद्ध की राह” चुनते हैं तो इसे कैसे अंजाम दिया जाएगा और मोदी-अली खान जैसी सुविधा वाली जगहों पर कितना प्रभाव होगा।
- कूटनीतिक योजनाओं की समीक्षा: यूएस–यूरोपीय साझेदारी के साथ ट्रंप की नई नीतियाँ, और रूस–चीन के मध्यस्थ प्रयास।
- इज़राइल–ईरान संघर्ष का क्षेत्रीय प्रभाव: मिस्र, ओमान, अरब राष्ट्रों का रुख, और संभावित ऊर्जा आपूर्ति बाधाएँ।
🟣 निष्कर्ष
“यह संकट न केवल मध्य-पूर्व में, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी एक निर्णायक मोड़ है। अगले दो सप्ताह तय करेंगे कि अमेरिका किस मार्ग पर अग्रसर होगा—मजबूत धमकी या सफल कूटनीति। दर्शकों से आग्रह है, जुड़े रहें, क्योंकि यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई।”