
क्या टीम इंडिया के कोच के तौर पर गांगुली की वापसी होने जा रही है?
क्या गौतम गंभीर की जगह अब दादा लेंगे कमान?
और क्या राजनीति में आने के सवाल पर गांगुली ने साफ-साफ जवाब दे दिया है?
आईये जानते हैं इस पूरी कहानी को, विस्तार से।
सौरव गांगुली यानी ‘दादा’, भारतीय क्रिकेट के सबसे आक्रामक कप्तानों में से एक।
जब भी क्रिकेट की बात होती है, उनका नाम इज्जत और जुनून के साथ लिया जाता है।
लेकिन अब चर्चा इस बात की है कि क्या गांगुली फिर से टीम इंडिया के साथ किसी बड़े रोल में नजर आएंगे?
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान गांगुली से पूछा गया —
“क्या आप टीम इंडिया के कोच बनना चाहेंगे?”
इस पर उन्होंने बेझिझक जवाब दिया,
“हर कोई भारत का कोच बनना चाहता है।”
गांगुली ने स्वीकार किया कि ये एक बेहद सम्मानजनक जिम्मेदारी है।
उनके इस बयान से साफ है कि वह इस पद को लेकर उत्सुक हैं।
बतौर कोच गांगुली ने गंभीर की तारीफ की। लेकिन गांगुली की कोच बनने की इच्छा जाहिर करने पर BCCI इस पर क्या निर्णय लेती है यह तो वक्त ही बताएगा। देखना होगा कि 2026 में BCCI उन्हें टीम इंडिया का कोच बनाती है या फिर किसी और को।
राजनीति को लेकर भी सवाल हुआ।
क्योंकि कई बार गांगुली का नाम बीजेपी और टीएमसी से जोड़ा गया।
लेकिन दादा ने यहां भी साफ शब्दों में कह दिया —
“मेरा राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है।”
उन्होंने कहा कि वो अपनी जिंदगी में वही करते हैं जो उन्हें अच्छा लगता है — और अभी क्रिकेट ही उनका फोकस है।
गांगुली के कोच बनने की अटकलों के बीच यह जरूर माना जा रहा है कि अगर उन्हें जिम्मेदारी मिली —
तो वे अपने अनुभव और रणनीति से टीम इंडिया को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं।
तो क्या दादा फिर से टीम इंडिया की कमान संभालेंगे — इस बार बतौर कोच?
या फिर BCCI किसी और दावेदार को चुनेगा?
आपका क्या मानना है — गांगुली को कोच बनाना चाहिए या नहीं?
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