
तो आखिर माजरा क्या है? चलिए जानते हैं।
इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने इस सीरीज़ की ट्रॉफी का नाम दो दिग्गजों के नाम पर रखने का ऐलान किया — भारत के सचिन तेंदुलकर और इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन। लेकिन इस फैसले पर सुनील गावस्कर ने सवाल उठाए हैं।
गावस्कर का कहना है,
“अगर ट्रॉफी का नाम दो दिग्गजों के नाम पर रखना ही था, तो सचिन तेंदुलकर का नाम पहले क्यों नहीं है? उन्होंने अपने खेल करियर में वो मुकाम हासिल किया है, जो क्रिकेट जगत में बेमिसाल है। एंडरसन भी महान हैं, लेकिन तुलना के लिहाज से देखें तो तेंदुलकर का कद कहीं ऊंचा है।”
गावस्कर का इशारा साफ था — जब भारतीय खिलाड़ी का नाम ट्रॉफी में जोड़ा गया है, तो उसे प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?
🏏 तथ्य ये हैं:
- सचिन तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए, जो अब भी एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है।
- जेम्स एंडरसन, जो हाल ही में टेस्ट क्रिकेट से रिटायर हुए हैं, उनके नाम 700 विकेट हैं — जो तेज गेंदबाजों में सबसे ज्यादा हैं।
- ECB ने यह ट्रॉफी पहली बार दोनों देशों की क्रिकेट विरासत को सम्मान देने के लिए बनाई है।
लेकिन सवाल यह भी है कि —
जब भारत और इंग्लैंड के क्रिकेट रिश्तों की बात हो रही हो, तो भारत के महान बल्लेबाज का नाम क्यों पीछे रखा गया?
🗣️ फैंस की राय:
सोशल मीडिया पर भी फैंस दो हिस्सों में बंटे दिख रहे हैं। कुछ लोग इस नाम को सम्मानजनक मानते हैं, तो कुछ को लगता है कि भारत के प्रति कम सम्मान दिखाया गया है।
🎬 अंत में…
क्या ECB को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए?
क्या ट्रॉफी का नाम “Tendulkar–Anderson” की जगह “Anderson–Tendulkar” रखना सही था?
आपका क्या मानना है?
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जय हिंद, जय क्रिकेट!