
“बारिश जहां ताजगी लाती है, वहीं साथ लाती है नमी, बैक्टीरिया… और कई तरह के इंफेक्शन। इन्हीं में से एक है — कान का संक्रमण। अगर आप भी मानसून में कान में दर्द या खुजली महसूस करते हैं, तो सावधान हो जाइए!”
🌧️ बरसात और कान का रिश्ता – खतरे का इशारा
बारिश के मौसम में हवा में मौजूद नमी फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन को बढ़ावा देती है। कान जैसे नाजुक अंग में यह संक्रमण जल्दी पनप सकता है — खासकर जब आप गीले बालों, गंदे ईयरफोन या गीले कपड़े का इस्तेमाल करते हैं।
🚨 कान के इंफेक्शन के आम लक्षण
🩺 यदि आपको इन लक्षणों में से कोई भी महसूस हो रहा है, तो यह संक्रमण की ओर इशारा हो सकता है:
- कान में लगातार दर्द
- अंदरूनी खुजली
- सुनाई देने में दिक्कत
- कान के बाहर सूजन या लालिमा
- भारीपन या बंद जैसा महसूस होना
- कान से पस या बदबूदार द्रव का रिसाव
⚠️ क्यों होता है कान का संक्रमण?

- बारिश की नमी और गंदगी
- ईयरबड्स या ईयरफोन का गंदा इस्तेमाल
- दूसरों के ईयरफोन का साझा प्रयोग
- गले में इंफेक्शन का असर कानों तक पहुंचना
- साफ-सफाई में लापरवाही
✅ इन उपायों को अपनाकर रखें कानों को सुरक्षित
- कान को सूखा और साफ रखें – नहाने या बारिश में भीगने के बाद तुरंत पोंछें।
- मुलायम कपड़ा या कॉटन यूज़ करें – कान की सफाई में किसी नुकीली चीज़ का प्रयोग न करें।
- ईयरबड्स का सीमित उपयोग करें – लगातार या गंदे ईयरबड्स संक्रमण फैला सकते हैं।
- दूसरे के ईयरफोन कभी न पहनें – यह सबसे आम संक्रमण का कारण है।
- ईयरफोन को समय-समय पर डिसइनफेक्ट करें – खासतौर पर मानसून में।
- गले का रखें विशेष ख्याल – गले के संक्रमण से कान भी प्रभावित हो सकते हैं।
- हर 6 महीने में ईएनटी डॉक्टर से जांच कराएं – बेहतर सुरक्षा के लिए।
🔔 निष्कर्ष: छोटी सावधानी, बड़ी सुरक्षा
बरसात में भीगे नहीं… भीतर से भी, अपनी सेहत को भीगने से बचाएं।
कानों की देखभाल सिर्फ साफ-सफाई से ही नहीं, बल्कि सही आदतों से होती है।
🎯 स्वस्थ कान, साफ सुनाई – यही है सच्चा मानसून का मजा!
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डिस्क्लेमर – कान के उपचार से संबंधित किसी भी उपचार को किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में करें।